देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार द्वारा उपनल कर्मचारियों पर एस्मा (उत्तराखंड आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) और नो वर्क नो पे लागू किए जाने को कठोर एवं अलोकतांत्रिक कदम बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। गोदियाल ने कहा कि उपनल कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्थाओं का भार बिना स्थायीकरण, बिना सुरक्षा और बिना उचित वेतन के उठाते आए हैं। आज जब वे अपने वैध अधिकारों और सेवा शर्तों के निर्धारण की मांग कर रहे हैं, तब सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है। यह धामी सरकार की नीतिगत विफलताओं और मानव संसाधन प्रबंधन की अक्षमता को उजागर करता है।
1. एस्मा लगाकर सरकार कर्मचारियों को अपराधी की तरह पेश करने की कोशिश कर रही है, जबकि वास्तविक अपराध उनकी वर्षों की उपेक्षा है।
2. यह कदम दर्शाता है कि सरकार बातचीत और समाधान से बच रही है।
3. उपनल व्यवस्था में मौजूद अनियमितताओं, कमीशन प्रणाली और संविदा-निर्भर ढांचे पर सरकार जवाब देने से बचती रही है।
4. प्रदेश में पहले से डॉक्टरों, नर्सों, तकनीकी स्टाफ, ड्राइवरों और फील्ड वर्कर्स की भारी कमी है, ऐसे में एस्मा लगाया जाना सरकार की घबराहट को साफ दर्शाता है।
गोदियाल ने सरकार से तीखे सवाल पूछे—क्या उपनल कर्मचारी मशीन हैं जिन्हें अधिकार मांगने पर दंडित किया जाएगा?
क्या संवाद और समाधान सरकार की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?
क्या सरकार उपनल प्रणाली की खामियों को छिपाने के लिए एस्मा को ढाल बना रही है?
कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की — उपनल कर्मचारियों पर लगाए गए एस्मा को तत्काल वापस लिया जाए। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ तुरंत वार्ता कर समाधान प्रक्रिया शुरू की जाए।
उपनल व्यवस्था की संपूर्ण समीक्षा कर पारदर्शी, स्थायी और सम्मानजनक रोजगार प्रणाली लागू की जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस उपनल कर्मियों के न्यायपूर्ण संघर्ष के साथ खड़ी है और सरकार की इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई का पुरजोर विरोध करती है।
