देहरादून। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने देहरादून के बसंत विहार स्थित नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग का औचक निरीक्षण कर विभागीय कार्यप्रणाली का व्यापक आकलन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न शाखाओं में संचालित कार्यों की प्रगति, लंबित फाइलों की स्थिति, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों का समयबद्ध एवं पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा जनहित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
डॉ. कुमार ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों में गति और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित करना है। उन्होंने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और जवाबदेह कार्य संस्कृति अपनाने पर जोर दिया।
बागेश्वर एवं गरुड़ की जीआईएस आधारित महायोजना की समीक्षा
निरीक्षण के उपरांत सचिव ने बागेश्वर एवं गरुड़ की जीआईएस आधारित महायोजना (मास्टर प्लान) की समीक्षा बैठक में भाग लिया। बैठक में संबंधित विभागों के प्रतिनिधि एवं जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकारी उपस्थित रहे। महायोजना के विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। नगरीय विस्तार, यातायात प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, जल निकासी, सार्वजनिक सुविधाओं तथा आधारभूत संरचना विकास से जुड़े विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
सचिव ने निर्देश दिए कि महायोजना को स्थानीय आवश्यकताओं, भौगोलिक परिस्थितियों एवं संभावित जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अंतिम रूप दिया जाए, ताकि सुनियोजित एवं सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
SASCI 2025–2026 एवं Deregulation 1.0 पर फोकस
सचिव ने SASCI 2025–2026 तथा Deregulation 1.0 के अंतर्गत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सरलीकरण एवं विनियमन शिथिलीकरण से संबंधित सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाएं, जिससे निवेश को प्रोत्साहन और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाना समय की आवश्यकता है।
बायोमेट्रिक उपस्थिति पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान सचिव ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी से बायोमेट्रिक उपस्थिति का विवरण प्राप्त किया और अनुपस्थित कार्मिकों के संबंध में स्पष्टीकरण तलब किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना अनुमति अथवा उचित कारण के किसी भी कार्मिक की अनुपस्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी। संबंधित कार्मिकों को स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश भी दिए गए। सचिव ने कहा कि कार्यालयीन अनुशासन और समयपालन विभागीय कार्यकुशलता की आधारशिला है तथा इसमें किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उपस्थित राजपत्रित अधिकारियों में श्री बालेश्वर मुंथिल (सहायक अधिकारी), श्री संजीव कौशिक (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी), श्रीमती श्रद्धा बहुगुण्डी, श्रीमती रूबी, श्रीमती प्रीति सैनी, श्री हिमांशु कुमार, श्री हरीश शर्मा (सहायक नियोजकगण) तथा कु. अंजली डंगवाल (सहायक वास्तुविद् नियोजक) शामिल रहे।
निवेश और विकास को मिलेगी गति
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य के संतुलित एवं सुनियोजित विकास में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभी महायोजनाएं स्थानीय आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएंगी। विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्धता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि SASCI 2025–2026 और Deregulation 1.0 के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निवेश और विकास को नई गति दी जाएगी तथा कार्यालयीन अनुशासन को सुदृढ़ कर आमजन को त्वरित और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
