देहरादून, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के स्थापना दिवस समारोह में मशहूर ग़ज़ल गायक तलत अज़ीज़ ने अपनी लोकप्रिय ग़ज़लों से ऐसा समां बाँधा कि सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
‘एहसास-ए-ग़ज़ल : इक शाम तलत अज़ीज़ के नाम’ शीर्षक से आयोजित इस विशेष संध्या की शुरुआत ग़ज़ल “तुझ सा पहले न कभी…” से हुई। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआती रचना “कैसे सुकून पाऊँ तुझे देखने के बाद…” सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
तलत अज़ीज़ ने ‘उमराव जान’ की मशहूर ग़ज़ल “ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है…” और फिल्म ‘बाज़ार’ की लोकप्रिय ग़ज़ल “फिर छिड़ी बात, रात फूलों की…” पेश कर समां बांधा। श्रोताओं की फरमाइश पर “आईना मुझसे मेरी पहली-सी सूरत मांगे…” और “आज जाने की ज़िद न करो…” जैसी सदाबहार ग़ज़लें सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए।
ग़ज़लकार को तबले पर जीतू शंकर, कीबोर्ड पर देवेन योगी व शाहिद अजमेरी, वायलिन पर इक़बाल वारसी और पर्कशन पर इमरान भियानी का संगत मिला। उनके सुर और संगत की जुगलबंदी ने इस शाम को और भी यादगार बना दिया।
समारोह का उद्घाटन ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने विश्वविद्यालय के 32 वर्षों के सफ़र पर प्रकाश डालते हुए किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एम.पी. सिंह ने किया।
