देहरादून। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में हाइब्रिड मैटेरियल्स विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हो गया। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने उन्नत तकनीकों, हाइब्रिड मैटेरियल्स और उनके विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य अतिथि स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ स्ट्रैथक्लाइड के प्रो. डिनो जारोसिंस्की ने कहा कि आने वाले समय में हाइब्रिड मैटेरियल्स नई तकनीक की नींव साबित होंगे और नवाचार को नई दिशा देंगे। उन्होंने बताया कि ये मैटेरियल्स न केवल अधिक सक्षम और टिकाऊ होते हैं, बल्कि विभिन्न परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता भी रखते हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि हाइब्रिड मैटेरियल्स में विश्व को बदलने की अपार संभावनाएं निहित हैं और इनके उपयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में इनके प्रयोग से सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।
नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के वैज्ञानिक डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि पारंपरिक मैटेरियल्स से भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करना संभव नहीं है। वर्तमान की जटिल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मल्टी कंपोनेंट मैटेरियल्स का विकास अत्यंत आवश्यक हो गया है।
तीन दिवसीय इस सम्मेलन में 10 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें ऑप्टिकल संरचनाओं की विशेषताएं, कार्बन नैनोट्यूब, प्लाज्मोनिक धातु, ग्राफीन आधारित उन्नत इलेक्ट्रोड, हाइड्रोजन ईंधन और मॉलिक्यूल इंटरफेस प्लेटफार्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन होगा। सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिभागी ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता कर रहे हैं।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग और नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (सीएसआईआर) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। सम्मेलन में जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट के प्रो. पैट्रिक मुग़ली, मुंबई के टीआईएफआर के प्रो. श्रीगणेश प्रभु, विभागाध्यक्ष डॉ. फतेह सिंह गिल, बीआईएस के नोडल अधिकारी डॉ. बृजेश प्रसाद सहित अन्य शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
