देवीधुरा (चंपावत)। रक्षाबंधन के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध देवीधुरा मेले में आयोजित ऐतिहासिक बग्वाल नौ मिनट चली, जिसमें 150 से अधिक बग्वाली वीर घायल हो गए। करीब 550 से अधिक वीरों ने इसमें भाग लिया। केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा और जिलाधिकारी मनीष कुमार भी इस रोमांचक परंपरा के साक्षी बने।
सुबह मौसम खराब होने से लोग देर से घरों से निकले, लेकिन दोपहर तक खोलीखांड-दुआचौड़ मैदान के चारों ओर दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा के अनुसार सबसे पहले पश्चिम दिशा से वालिक खाम के वीर पहुंचे और मां बाराही की परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उत्तर दिशा से गहड़वाल और चम्याल खाम, तथा अंत में लमगड़िया खाम के योद्धा मैदान में उतरे।
गहड़वाल खाम के 96 वर्षीय प्रमुख त्रिलोक सिंह बिष्ट, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, वालिक खाम के बद्री सिंह बिष्ट और लमगड़िया खाम के युवा प्रमुख वीरेंद्र लमगड़िया ने बग्वाल से पूर्व मां बाराही से सकुशल आयोजन की प्रार्थना की। ठीक 1:57 बजे शंखनाद के साथ बग्वाल शुरू हुई और दोनों ओर से पत्थर, फल-फूल बरसने लगे। नौ मिनट तक चली इस परंपरा का समापन पुजारी के मैदान में पहुंचने के साथ हुआ।
संघर्ष समाप्त होते ही योद्धा गले मिलकर कुशलक्षेम पूछने लगे। मैदान और मंदिर परिसर में घायलों के उपचार के लिए तीन चिकित्सा शिविर लगाए गए थे। सीएमओ डॉ. देवेश चौहान के अनुसार किसी को गंभीर चोट नहीं आई।
मेला कमेटी अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने आयोजन के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर मां बाराही, स्थानीय जनता, प्रशासन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
