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उत्तराखंडधर्म–संस्कृति

शिव-शक्ति मिलन है ऊर्जा का यज्ञ, यही सनातन दर्शन — स्वामी रसिक महाराज

 

देहरादून,  मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मण्डली के तत्वावधान में आयोजित श्री देवी भागवत कथा एवं आशीर्वाद कवच महायज्ञ के सातवें दिन नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने भगवान शिव एवं माता गौरा के विवाह के आध्यात्मिक अर्थ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में काम को केवल दैहिक भोग नहीं, बल्कि सृष्टि की मूल शक्ति और साधना का माध्यम माना गया है।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि कामाख्या शक्ति-पीठ वह दिव्य स्थल है, जहां इच्छा, ऊर्जा और चेतना एक ही स्रोत से प्रकट होती हैं। यहां काम को पाप या कमजोरी नहीं, बल्कि सृजनात्मक शक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है। सनातन धर्म में स्त्री-पुरुष का मिलन केवल शरीरों का संयोग नहीं, बल्कि शिव और शक्ति — दो ऊर्जाओं का पवित्र यज्ञ है।

उन्होंने कहा कि यदि मिलन वासना तक सीमित रह जाए तो वह बंधन बनता है, किंतु चेतना और सजगता के साथ वही मिलन साधना में परिवर्तित हो जाता है। जब प्रेम, एकाग्रता और जागरूकता के साथ ऊर्जा का संचार होता है, तो वह नीचे से ऊपर उठकर आत्मबल, तेज और आकर्षण का कारण बनती है।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि सनातन ग्रंथों में काम को जीवन की प्रखरतम ऊर्जा बताया गया है, जो मनुष्य को पतन की ओर भी ले जा सकती है और उत्थान का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है। कामाख्या साधना का संदेश दमन नहीं, बल्कि रूपांतरण है। शरीर को अस्वीकार नहीं, बल्कि सम्मान के साथ स्वीकार करना ही साधना का मूल है, क्योंकि शरीर ही मंदिर है और शक्ति उसी में प्रतिष्ठित है।

उन्होंने बताया कि कामाख्या की तांत्रिक उपासना में देवी को योनिरूप में सृष्टि के उद्गम स्थल के रूप में पूजित किया जाता है। मंत्र, ध्यान और श्वास साधना द्वारा काम-ऊर्जा को आत्मचेतना की दिशा में प्रवाहित किया जाता है। अमावस्या, अंबुबाची पर्व और तांत्रिक रात्रियां इस साधना के लिए विशेष रूप से प्रभावकारी मानी गई हैं।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार काम पर नियंत्रण दमन से नहीं, बल्कि उसके उच्चतर स्वरूप से होता है। जब मनुष्य यह समझ लेता है कि मिलन केवल भोग नहीं, देवी-पूजन है, तब साधारण अनुभव भी आध्यात्मिक हो जाता है। यही सनातन संस्कृति का महान संदेश है कि प्रेम और कामना को घृणा नहीं, सम्मान की दृष्टि से देखा जाए।

उन्होंने कामाख्या साधना में प्रचलित मंत्र

ॐ श्री कामाख्यायै कामेश्वर्यै क्लीं नमः स्वाहा

का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जप से इच्छा-शक्ति सुदृढ़ होती है, मन में शांति आती है तथा आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

कार्यक्रम में साध्वी मां देवेश्वरी, पार्षद पुष्कर चौहान, पार्षद सतीश कश्यप,  शशि चमोली, भाजपा नेत्री बीना नौटियाल, गौरव शर्मा,  नरेंद्र कोटनाला, मुकेश ध्यानी, भाजपा मंडल महामंत्री  अंजू ध्यानी, हिमांशु कोटनाला, अनुज कुमार, दिव्या, श्रेया, नीमा रौथाण, अंजू विष्ट, सम्पूर्णानंद मुंडेपी सहित बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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