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उत्तराखंडधर्म–संस्कृति

जीवन का अंतिम और अमिट सत्य राख ही तो है” – रसिक महाराज

 

 देहरादून,नवदुर्गा मंदिर, क्लेमेनटाउन में आयोजित शिवमहापुराण कथा के अवसर पर नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिक संसार की नश्वरता का बोध कराने के लिए ही भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं। यह भस्म हमें जीवन का यह कटु, परंतु आवश्यक सत्य याद दिलाती है कि जो आज है, वह कल राख बन जाने वाला है।

स्वामी जी ने कहा, “हमारी सारी भौतिक संपत्तियाँ, हमारे शरीर सहित, अंततः एक मुट्ठी राख में परिवर्तित हो जाते हैं। यही जीवन का अंतिम और अमिट सत्य है – राख ही प्रत्येक वस्तु का सार है और इसी सार को भगवान शिव धारण करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवान शिव मानव मात्र को यह संदेश देते हैं कि किसी भी वस्तु का अभिमान न करें, क्योंकि सभी वस्तुएँ अंततः नष्ट हो जाने वाली हैं। चाहे वह बल हो, वैभव हो या संपत्ति – सब यहीं रह जाना है। उन्होंने कहा कि ईश्वर कृपा से प्राप्त संसाधनों को परमार्थ, परोपकार, सद्कर्मों और सेवा में लगाना ही सच्ची मनुष्यता और दैवत्व है।

कार्यक्रम में साध्वी माँ देवेश्वरी, विपेन्द्र डबराल, वरिष्ठ समाजसेवी विनोद राई ,कुसुम डबराल, उम्मेद सिंह, वसु रौथाण, लता सिंह, रवि सिंह, रमेश जदली, अनीता जदली, सम्पूर्णानन्द मुण्डेपी, सत्तेश्वरी मुंडेपी, ऊषा धस्माना, दिनेश डबराल, मंजू कोटनाला सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।

 

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